भारत में Nimesulide + Paracetamol Tablets पर प्रतिबंध

भारत में Nimesulide + Paracetamol Tablets पर प्रतिबंध
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भारत सरकार ने दवाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन (एफडीसी) दवाओं पर प्रतिबंध लगाया है। इनमें निमेसुलाइड और पैरासिटामॉल की संयुक्त टैबलेट भी शामिल है, जो दर्द और बुखार के इलाज में इस्तेमाल होती थी। यह प्रतिबंध जून 2023 में लागू किया गया था, जब स्वास्थ्य मंत्रालय ने 14 ऐसी एफडीसी दवाओं को प्रतिबंधित कर दिया। इस फैसले का मुख्य कारण यह था कि इन दवाओं में कोई चिकित्सकीय औचित्य नहीं था और इनके जोखिम फायदों से अधिक थे।

प्रतिबंध का इतिहास
निमेसुलाइड एक नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग (एनएसएआईडी) है, जो दर्द और सूजन कम करने के लिए इस्तेमाल होती है। पैरासिटामॉल के साथ इसका संयोजन भारत में लोकप्रिय था, लेकिन कई देशों में निमेसुलाइड पर पहले से ही प्रतिबंध था। उदाहरण के लिए, स्विट्जरलैंड, स्पेन और अमेरिका में 2000 में ही इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। भारत में 2011 में बच्चों (12 साल से कम उम्र) के लिए निमेसुलाइड पर प्रतिबंध लगाया गया, क्योंकि इससे लीवर टॉक्सिसिटी का खतरा था।

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2023 में, सरकार ने निमेसुलाइड + पैरासिटामॉल डिस्पर्सिबल टैबलेट समेत 14 एफडीसी को प्रतिबंधित किया। सूची में अन्य दवाएं जैसे एमॉक्सिसिलिन + ब्रोमहेक्सिन और फेनसेडिल + क्रेमेंटाइन भी शामिल थीं। हाल ही में, जनवरी 2026 के आसपास, सरकार ने 100 मिलीग्राम से अधिक की ओरल निमेसुलाइड फॉर्मूलेशन पर भी प्रतिबंध लगा दिया, जो स्वास्थ्य जोखिमों के कारण |

प्रतिबंध के कारण
स्वास्थ्य जोखिम: निमेसुलाइड से लीवर डैमेज का खतरा बढ़ता है, खासकर बच्चों में। पैरासिटामॉल के साथ संयोजन से यह जोखिम और बढ़ जाता है।
कोई चिकित्सकीय फायदा नहीं: विशेषज्ञ समिति ने पाया कि इन एफडीसी में कोई अतिरिक्त लाभ नहीं है, जबकि सुरक्षित विकल्प उपलब्ध हैं।
अंतरराष्ट्रीय मानक: कई देशों में पहले से प्रतिबंधित होने के कारण भारत को भी कदम उठाना पड़ा।

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प्रभाव और सलाह
यह प्रतिबंध दवा कंपनियों को उत्पादन रोकने और बाजार से उत्पाद वापस लेने का आदेश देता है। उपभोक्ताओं को सलाह है कि वे डॉक्टर से परामर्श लें और सुरक्षित विकल्प जैसे साधारण पैरासिटामॉल या इबुप्रोफेन का इस्तेमाल करें। स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि यह कदम जन स्वास्थ्य की रक्षा के लिए आवश्यक था।

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यह प्रतिबंध भारत में दवा विनियमन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो सुनिश्चित करता है कि केवल सुरक्षित और प्रभावी दवाएं ही बाजार में उपलब्ध हों।

By Dr. Avinash Joriya

Dr. Avinash Joriya is the Founder & CEO of Edupharmaexpert.in and an Associate Professor with over 7 years of expertise in pharmacy education and pharmacological research. A B.Pharm and M.Pharm alumnus of AKTU Lucknow, he has contributed to major government projects like Namami Gange (NMCG). With 5 published textbooks and an Indian Design Patent, Dr. Joriya is dedicated to mentoring students and bridging the gap in the pharma profession. We provide specialized guidance on Pharmacy careers (D.Pharm to PhD), alongside expert takes on Health, Education, Travel, Technology, Finance, and Books, helping the next generation of professionals build better habits and successful careers. And Never miss any New updates from Edupharmaexpert.in

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